‘हर साल उठता है यूएन में सुधार का मुद्दा’:विरोध करने वाले देशों को जयशंकर की दो टूक, कहा- मतदान से हो फैसला – S-jaishankar-un-reforms-opponents-using-un-security-council-reform


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे को लेकर निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो देश संयुक्त राष्ट्र में सुधार का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में इस संगठन को लेकर गंभीर नहीं हैं और केवल इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा हर साल महासभा के दौरान उठता है, लेकिन अब इसे लेकर भावना और मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर सुधार को लेकर गंभीरता है तो इसके लिए टेक्स्ट आधारित बातचीत जरूरी है, क्योंकि किसी लिखित मसौदे के बिना बातचीत को वास्तविक वार्ता नहीं कहा जा सकता।

संयुक्त राष्ट्र में मजबूत हुई सुधार की भावना : एस जयशंकर

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “निराशा बढ़ रही है, क्योंकि अगर हम सुधार को लेकर गंभीर हैं तो हमें टेक्स्ट आधारित बातचीत की जरूरत है। आप बिना किसी टेक्स्ट के बातचीत नहीं कर सकते। अगर टेक्स्ट ही नहीं है तो वह बातचीत नहीं, बल्कि समय हासिल करना है।”

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार के समर्थन की भावना गहरी हुई है। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित एक मंत्रीस्तरीय सत्र में कही। इस कार्यक्रम का आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन, भारत में संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने किया था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह भावना है कि संयुक्त राष्ट्र को बदलने की जरूरत है और उसे वास्तविक दुनिया के अनुरूप अधिक बनाया जाना चाहिए।

जयशंकर ने कहा, “यही वास्तव में उस विचार का आधार है कि संयुक्त राष्ट्र को बदलना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र को समय से पीछे माना जा रहा है। यह संयुक्त राष्ट्र विरोधी होना नहीं है। वास्तव में जो लोग संयुक्त राष्ट्र की परवाह करते हैं, वे उसमें सुधार चाहते हैं। मैं आपसे कहूंगा कि जो लोग सुधार का विरोध करते हैं, वे वास्तव में संयुक्त राष्ट्र की परवाह नहीं करते।” उन्होंने कहा, “वे संयुक्त राष्ट्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें संयुक्त राष्ट्र की परवाह नहीं है। आज यह भावना काफी मजबूत है।” 

बहुमत से सुधार की प्रक्रिया पर जोर

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार सर्वसम्मति से नहीं हो सकता। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि घरेलू स्तर पर भी लोकतंत्र में फैसले बहुमत और मतदान के जरिए किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति और देश को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए और उसके बाद मतदान के जरिए फैसला किया जाना चाहिए।

जयशंकर ने कहा, “आपको सभी के विचार उस टेक्स्ट में शामिल करने होंगे और फिर उन विचारों का लोकतांत्रिक तरीके से समाधान तलाशना होगा।” उन्होंने कहा कि अगर सुधार की इच्छा है तो बातचीत के लिए एक मसौदा होना जरूरी है। उनके मुताबिक, सभी देशों के विचार उस मसौदे में शामिल किए जाने चाहिए और उसके बाद उन पर लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय होना चाहिए।

ग्लोबल साउथ में बढ़ी सहयोग की भावना

विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों में एक-दूसरे के साथ सहयोग और विचार साझा करने की इच्छा पहले की तुलना में अधिक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि देश एक-दूसरे से ज्यादा बातचीत करने और साथ मिलकर अधिक काम करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, इससे पुरानी निर्भरता कम होती है और दुनिया अधिक लोकतांत्रिक बनती है।

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में महिला महासचिव का विचार नीचे से ऊपर की ओर आने वाला विचार है, न कि ऊपर से नीचे की ओर थोपा गया विचार।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी कर चुके हैं सुधार की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में सुरक्षा परिषद में सुधार की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सुरक्षा परिषद को आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करना चाहिए और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए उसकी वैधता सुनिश्चित होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा का उच्चस्तरीय सप्ताह 18 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहा है।

भारत लंबे समय से कर रहा है सुधार की मांग

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की वकालत करता है। भारत का कहना है कि 1945 में गठित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती।

भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की अपनी मांग भी लगातार रखता रहा है। साथ ही भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट का उम्मीदवार है, जिसके लिए चुनाव अगले साल जून में होने हैं।



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