Trade:’भारत के साथ व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं’, व्यापार समझौते पर बोले अमेरिकी प्रतिनिधि – ‘it Is Not Easy To Reach An Agreement On Trade Issues With India,’ Says Us Representative On Trade Deal


भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी वार्ता के बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत एक ‘टफ नट टू क्रैक’ है, यानी भारत के साथ व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं है। ग्रीर ने यह टिप्पणी अमेरिकी कांग्रेस की समिति के सामने की। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों की सुरक्षा करता आया है और मौजूदा व्यापार वार्ता में भी वह कई क्षेत्रों को संरक्षित रखना चाहता है।

उन्होंने कहा कि भारत अपने घरेलू हितों को प्राथमिकता देता है, खासकर कृषि क्षेत्र में, इसलिए बातचीत आसान नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहमति बनने की संभावना है।

12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की बातचीत

वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी विदेश मंत्री ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व वाली अमेरिकी टीम के साथ व्यापार समझौते के बारीक बिंदुओं पर बातचीत की। तीन दिवसीय वार्ता बुधवार को समाप्त हुई। ग्रीर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की कमेटी ऑन वेज एंड मीन्स को बताया कि भारत एक कठिन चुनौती है… उन्होंने बहुत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों की रक्षा की है।

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ग्रीर ने और क्या कहा?


उन्होंने कहा, ‘इस समझौते के तहत वे इनमें से कई चीजों की रक्षा करना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। डीडीजी (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।’ ग्रीर सांसदों द्वारा डीडीजी के निर्यात पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे, जिनका उपयोग उच्च प्रोटीन वाले पशुधन चारे, सोयाबीन मील और इथेनॉल के रूप में किया जाता है।

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार भारत के वार्ताकारों के साथ डीडीजी जैसे विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। ग्रीर ने कहा, ‘भारतीय व्यापार वार्ताकार इस सप्ताह शहर में हैं। इसलिए हम इस सप्ताह इन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं, जिनमें आपके द्वारा चर्चा की गई ये विशिष्ट वस्तुएं, डीडीजी भी शामिल हैं।’ भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की और 7 फरवरी को समझौते का पाठ जारी किया।

भारत की क्या मांग?

इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी बाजारों में तरजीही पहुंच की मांग कर रहा है, क्योंकि दोनों देश 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। उस ढांचे के अनुसार, अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी। उसने रूसी तेल खरीदने पर भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया था और समझौते के तहत शेष 25 प्रतिशत को घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था।


लेकिन 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए पारस्परिक टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया, जो 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर, भारत नए वैश्विक टैरिफ ढांचे के तहत अपने हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौते को फिर से समायोजित और पुनर्गठित करने की कोशिश कर रहा है।



 



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