One Watt Rule:’वन वॉट रूल’ क्या है? जानिए कैसे ये छोटे सा नियम हर दिन बचा रहा है अरबों यूनिट बिजली – How One Watt Rule Helping To Save Electricity Through Out World
क्या था यह संकट और कैसे बना नियम?
1990 के दशक में जब घरों में इलेक्ट्रॉनिक सामान बढ़ने लगे, तब एक बड़ी समस्या सामने आई। उस समय के टीवी और म्यूजिक सिस्टम बंद होने (स्टैंडबाय मोड) पर भी 5 से 10 वॉट तक बिजली खर्च करते थे। अगर एक घर में ऐसे कई डिवाइस हों और दुनिया भर के करोड़ों घरों को मिला लिया जाए, तो बिना इस्तेमाल के ही हर दिन लाखों किलोवॉट बिजली बर्बाद हो रही थी।
इस भारी बर्बादी को देखकर साल 1999 में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने दुनिया भर की सरकारों और कंपनियों से कहा कि हमें एक ऐसा नियम बनाना चाहिए जिससे कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस स्टैंडबाय मोड में 1 वॉट से ज्यादा बिजली खर्च न करे। इसी पहल को ‘वन वॉट रूल’ का नाम दिया गया।
कंपनियों ने कैसे किया बदलाव?
इस नियम के आने के बाद टेक कंपनियों को अपने डिवाइस बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव करना पड़ा। पहले डिवाइस के अंदर के सर्किट हर समय पूरी तरह ऑन रहते थे ताकि रिमोट का बटन दबाते ही मशीन तुरंत चालू हो जाए। लेकिन नए नियम के बाद कंपनियों ने ऐसे स्मार्ट पावर मैनेजमेंट सिस्टम बनाए जो मशीन के बंद होने पर उसके ज्यादातर हिस्सों की पावर कट कर देते हैं। केवल रिमोट का सिग्नल पकड़ने वाला एक छोटा सा सेंसर ऑन रहता है, जो 1 वॉट से भी कम बिजली लेता है।
आज के समय में इसका असर
साल 2010 और 2013 के आसपास यूरोप, अमेरिका और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में इसे एक कड़े कानून के तौर पर लागू कर दिया गया। भारत में भी ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) स्टार रेटिंग देते समय इस बात का खास ध्यान रखता है। आज जब आप बाजार से कोई 4-स्टार या 5-स्टार रेटिंग वाला नया स्मार्ट टीवी या फ्रिज लाते हैं, तो वह इसी ‘वन वॉट रूल’ को ध्यान में रखकर बनाया गया होता है।



