Green Jobs:बढ़ रहा है ग्रीन जॉब्स का दायरा; सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं, हर स्ट्रीम के लिए बढ़ रहे नौकरी के मौके – Green Jobs On The Rise: Career Opportunities Expanding Beyond Engineering For Students Of All Streams
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Green Jobs: भारत तेजी से स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य के तहत सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। एनएलबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2027 तक ग्रीन सेक्टर में लगभग लाखों नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
एआई, डाटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण तकनीक और सस्टेनेबिलिटी की समझ रखने वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। साथ ही, कंपनियां अब ईएसजी मानकों पर भी जोर दे रही हैं, जिससे ईएसजी ऑडिटर और ग्रीन टेक विशेषज्ञ जैसी नौकरियों के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : Adobe Stock
क्या हैं ग्रीन जॉब्स?
ग्रीन जॉब्स ऐसे रोजगार हैं, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने से जुड़े होते हैं। इन नौकरियों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है। यह क्षेत्र केवल इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग सभी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए नए अवसर खोल रहा है।

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कौन-सी स्किल्स होंगी जरूरी?
इस क्षेत्र में केवल पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। बदलते दौर में युवाओं को तकनीक और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े नए कौशल सीखने होंगे। इसी कारण डाटा एनालिटिक्स, एआई, ऑटोमेशन, सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट, कार्बन अकाउंटिंग, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स, ईएसजी रिपोर्टिंग और डिजिटल ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे कौशल तेजी से महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं।

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व्यावहारिक अनुभव
इसमें छात्रों को व्यावहारिक अनुभव हासिल करने पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए वे सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में इंटर्नशिप कर सकते हैं, एनजीओ और सस्टेनेबिलिटी प्रोजेक्ट्स से जुड़ सकते हैं, तथा क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा रिसर्च प्रोजेक्ट्स, हैकाथॉन और इनोवेशन कार्यक्रमों में भाग लेने से नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे अनुभव न केवल इंडस्ट्री एक्सपोजर बढ़ाते हैं, बल्कि प्रोफेशनल नेटवर्किंग को भी मजबूत बनाते हैं।
- तकनीक और सस्टेनेबिलिटी की समझ रखने वाले युवाओं की मांग बढ़ रही है।
- एआई, डाटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन ग्रीन सेक्टर का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
- कंपनियां अब ईएसजी (एन्वॉयरन्मेंटल, सोशल और गवर्नेस) मानकों पर भी फोकस कर रही हैं।

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विभिन्न शैक्षिक क्षेत्रों के लिए विकल्प
इंजीनियरिंग के छात्र सोलर, विंड एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) सेक्टर में अपना कॅरिअर बना सकते हैं। वहीं कॉमर्स और मैनेजमेंट से जुड़े विद्यार्थी क्लाइमेट फाइनेंस, ईएसजी रिपोर्टिंग और सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। कृषि क्षेत्र के छात्रों के लिए स्मार्ट फार्मिंग और ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर में संभावनाएं हैं। वहीं डाटा साइंस, एआई और एनालिटिक्स सीखने वाले युवा क्लाइमेट डाटा एनालिटिक्स और ग्रीन टेक इनोवेशन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।