राजनीति के खिलाड़ी:चुनाव में उतरे खेल जगत के ये धुरंधर; डिंडा से शिब तक, किस्मत का फैसला आज; कौन जीतेगा बाजी? – West Bengal Election Results 2026: From Sports Icons To Political Contenders, All Eyes On Athlete Candidates


पश्चिम बंगाल विधानसभा समेत पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आज सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर हुए मतदान के बाद सत्ता किसके हाथ जाएगी। हालांकि, इस बार चुनावी जंग सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रही। मैदान में ऐसे चेहरे भी उतरे जिन्होंने कभी स्टेडियम में देश और राज्य का नाम रोशन किया था। इस चुनाव में खेल जगत से जुड़े कई खिलाड़ी भी मैदान में उतरे। आज उनके भविष्य का भी फैसला होना है।

क्रिकेट की पिच से लेकर फुटबॉल मैदान तक और एथलेटिक्स ट्रैक से लेकर टेनिस कोर्ट तक चमकने वाले खिलाड़ी अब वोटों की गिनती में अपनी लोकप्रियता की परीक्षा दे रहे हैं। यही वजह है कि आज के नतीजों में इन खेल हस्तियों पर भी खास नजर बनी हुई है। राजनीतिक दलों ने इस बार खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। वजह साफ है- खिलाड़ियों की जनता के बीच पहचान, संघर्ष की कहानी और अनुशासन की छवि। अब देखना होगा कि क्या मैदान की जीत उन्हें विधानसभा तक पहुंचा पाती है।

भाजपा का दांव: अशोक डिंडा पर भरोसा

पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा भाजपा के टिकट पर मोयना सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। वह फिलहाल अपनी सीट पर लीड कर रहे हैं। उन्हें 73 हजार से ज्यादा वोट मिल चुके हैं। दूसरे नंबर पर मौजूद टीएमसी के चंदन मंडल पर उनकी बढ़त 5000+ वोटों की है। बंगाल क्रिकेट का बड़ा नाम रहे डिंडा ने भारत के लिए वनडे और टी20 क्रिकेट खेला है। डिंडा ने भारत के लिए 13 वनडे और नौ टी20 मैच खेले, जिनमें कुल 29 विकेट लिए। आईपीएल में भी उन्होंने 78 मैचों में 69 विकेट झटके। घरेलू क्रिकेट में बंगाल के लिए उनका रिकॉर्ड शानदार रहा, जहां उन्होंने 116 फर्स्ट क्लास मैचों में 420 विकेट हासिल किए। डिंडा की छवि मेहनती और जुझारू खिलाड़ी की रही है। भाजपा को उम्मीद है कि उनकी लोकप्रियता वोटों में बदलेगी।

टीएमसी का क्रिकेट कार्ड: शिब शंकर पॉल

तृणमूल कांग्रेस ने तुफानगंज सीट से पूर्व क्रिकेटर शिब शंकर पॉल को मैदान में उतारा है। हालांकि, वह फिलहाल अपनी सीट से पीछे (दूसरे नंबर पर) चल रहे हैं। भाजपा की मालती रावा रॉय 16000+ वोटों से आगे चल रही हैं। पॉल बंगाल घरेलू क्रिकेट का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। उन्होंने 14 साल तक बंगाल का प्रतिनिधित्व किया। 61 फर्स्ट क्लास मैचों में 220 विकेट लिए, जबकि सीमित ओवरों के 69 मैचों में 98 विकेट झटके। हालांकि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन बंगाल क्रिकेट में उनका बड़ा योगदान रहा। टीएमसी को उम्मीद है कि स्थानीय पहचान और खेल जगत की लोकप्रियता उन्हें फायदा पहुंचाएगी। 

गोल्ड मेडलिस्ट स्वप्ना बर्मन की राजनीतिक परीक्षा

राजगंज सीट से टीएमसी ने एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट स्वप्ना बर्मन को राजगंज सीट से उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, वह अपनी सीट से दूसरे नंबर पर चल रही हैं। भाजपा के दिनेश सरकार 14000+ वोटों से आगे चल रहे हैं। स्वप्ना भारतीय एथलेटिक्स का बड़ा नाम रही हैं। उन्होंने 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन का स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा 2017 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता। 2019 और 2023 में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किए। संघर्ष से सफलता तक की स्वप्ना की कहानी लोगों को प्रेरित करती है। राजनीति में उनकी एंट्री को टीएमसी ने बड़ा दांव माना है।

फुटबॉल मैदान से विधानसभा तक बिदेश रंजन बोस

सप्तग्राम सीट से टीएमसी ने पूर्व फुटबॉलर बिदेश रंजन बोस को सप्ताग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया है। 72 वर्षीय बोस मोहुन बागान क्लब के दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। फिलहाल वह अपनी सीट पर दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। भाजपा के स्वराज घोष ने 15000+ वोट की बढ़त बनाई हुई है। बिदेश ने भारतीय टीम का भी प्रतिनिधित्व किया है। मोहन बगान के लिए दो अलग-अलग दौर में खेले और कुल 37 टूर्नामेंट जीते। 1985 में कप्तान रहते हुए तीन खिताब भी दिलाए। फुटबॉल प्रेमी बंगाल में उनका नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है।

क्यों खिलाड़ियों को टिकट दे रहे दल?

राजनीतिक पार्टियां अब खिलाड़ियों को टिकट देकर दो बड़े फायदे देखती हैं। पहला, उनकी साफ-सुथरी और मेहनती छवि। दूसरा, जनता के बीच पहले से मौजूद पहचान। खिलाड़ी अक्सर युवाओं, खेल प्रेमियों और मध्यम वर्ग में लोकप्रिय होते हैं। यही वजह है कि चुनावी रणनीति में उनका महत्व बढ़ता जा रहा है।

आज होगा फैसला

आज जब वोटों की गिनती जारी है, तब यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या जनता खेल सितारों को राजनीति का सितारा बनाएगी? क्या क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स की चमक वोटों में बदलेगी? बंगाल चुनाव के नतीजे सिर्फ सरकार तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि खेल की लोकप्रियता सत्ता तक पहुंचाने में कितनी कारगर है।



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