पहले ‘गद्दार’ कहलाया, फिर लॉर्ड्स में रचा इतिहास: कैसे एक खिलाड़ी ने बदला इंग्लिश क्रिकेट? वर्ल्ड कप भी जिताया – From Dublin’s Amateur Grounds To World Champion At Lord’s: The Extraordinary Journey Of Eoin Morgan


क्रिकेट की दुनिया में कुछ कप्तान सिर्फ ट्रॉफियां नहीं जीतते, वे पूरी टीम की सोच बदल देते हैं। उनकी कप्तानी का असर स्कोरकार्ड से कहीं आगे दिखाई देता है। इयोन मॉर्गन भी ऐसे ही कप्तानों में शामिल हैं। आयरलैंड की शौकिया क्रिकेट पिचों से निकले मॉर्गन ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बनाया। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। इंग्लैंड का रुख करने के बाद मॉर्गन को अपने ही देश में आलोचना और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों का सामना करना पड़ा।


10 सितंबर 1986 को आयरलैंड के डबलिन में जन्मे इयोन मॉर्गन की क्रिकेट प्रतिभा ऐसे माहौल में विकसित हुई, जहां क्रिकेट बेहद सीमित लोकप्रियता वाला खेल था। उस समय आयरलैंड का स्थानीय क्रिकेट सेटअप पूरी तरह शौकिया था। राष्ट्रीय टीम में पोस्टमैन, राजमिस्त्री और मैकेनिक तक खेलते थे। हालांकि, मॉर्गन के पास एक खास खेल पृष्ठभूमि भी थी- हर्लिंग।

यह आयरलैंड का पारंपरिक और तेज रफ्तार खेल है, जिसमें लकड़ी की स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। हर्लिंग ने मॉर्गन की प्रतिक्रिया क्षमता और कलाई की ताकत को निखारा। आगे चलकर यही उनकी बल्लेबाजी की पहचान बनी। मॉर्गन रिवर्स स्वीप और छोटी बाउंड्री के ऊपर पिक-अप शॉट खेलने के मामले में अपने समय से काफी आगे नजर आए। उनकी प्रतिभा इतनी साफ थी कि कम उम्र में ही उन्होंने आयरलैंड की जूनियर टीमों में जगह बनानी शुरू कर दी।



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