Trade:un प्रमुख की दो टूक, एक या दो देशों से ही नहीं चलेगी दुनिया; जानिए मूडीज की रिपोर्ट में ईयू Fta पर क्या – Un Chief’s Blunt Statement: “the World Won’t Be Driven By Just One Or Two Countries.” Moody’s Report


संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने दुनिया में बहुआयामी व्यवस्था (मल्टी-पोलैरिटी) को समर्थन देने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान किसी एक या दो ताकतों द्वारा संभव नहीं है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का हवाला देते हुए कहा कि देशों के बीच मजबूत साझेदारी ही स्थिर और संतुलित विश्व व्यवस्था की आधारशिला बन सकती है।

अमेरिका और चीन ही दुनिया की समस्या नहीं खत्म कर सकते

2026 की प्राथमिकताओं को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा समय में अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली शक्ति है, जबकि भविष्य में अमेरिका और चीन के दो ध्रुवों वाली व्यवस्था की चर्चा होती है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो एक ताकत और न ही दो ताकतें दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकती हैं। इसके लिए देशों के बीच व्यापक नेटवर्क और सहयोग जरूरी है।

भारत-ईयू एफटीए पर क्या बोले?

गुटेरेस ने हालिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए भारत और ईयू के बीच हुए एफटीए को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के मार्कोसुर और इंडोनेशिया के साथ समझौते, भारत-ईयू डील, साथ ही चीन के साथ कनाडा और ब्रिटेन के व्यापार संबंध वैश्विक सहयोग के बढ़ते नेटवर्क को दर्शाते हैं।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुआ मुक्त व्यापार समझौता करीब दो अरब लोगों के बाजार को जोड़ने वाला ऐतिहासिक करार माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने इस समझौते के साथ व्यापार, रक्षा और प्रतिभा गतिशीलता को लेकर दो अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।

विकसित अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी घटी है

उन्होंने कहा कि पारंपरिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक हिस्सेदारी घट रही है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं तेजी से प्रभाव और आत्मविश्वास बढ़ा रही हैं। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और संरचनाओं को नए समय की वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा।

बोर्ड ऑफ पीस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

गुटेरेस ने गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए बोर्ड ऑफ पीस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की है। केवल सुरक्षा परिषद ही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बाध्यकारी फैसले ले सकती है और बल प्रयोग को मंजूरी दे सकती है।



उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाने वाले ही अक्सर इसके सुधार का विरोध करते हैं, जिससे संस्था अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं हो पाती।





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