Report:fy26 के बचे महीनों में केंद्र का कैपेक्स धीमा पड़ने की आशंका, सड़क-रेलवे पर रहा सबसे ज्यादा जोर – Central Capex Expected To Slow In Remaining Months Of Fy26, With Road And Railways Remaining The Biggest Focus
केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) वित्त वर्ष 2026 के शेष महीनों में धीमा पड़ सकता है। यह बात मॉर्गन स्टेनली की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष की पहली छमाही में कैपेक्स का बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च किया जा चुका है, जिससे आगे खर्च की रफ्तार कुछ नरम रह सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कैपेक्स फ्रंट-लोडेड रहा। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच केंद्र सरकार का कैपेक्स 6.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पूरे साल के बजटीय लक्ष्य का करीब 58.7 प्रतिशत है। यह जीडीपी का 3.4 प्रतिशत बनता है, जबकि वित्त वर्ष 2025 की समान अवधि में यह 2.7 प्रतिशत था, जिससे वित्त वर्ष की शुरुआत में मजबूत खर्च का संकेत मिलता है।
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कैपेक्स का लगभग 55% हिस्सा सड़कों और रेलवे क्षेत्र पर खर्च
बजट वित्त वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने कुल 11.21 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के कुल कैपेक्स का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा सड़कों और रेलवे क्षेत्र में लगाया गया है, जो बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाता है।
राज्य सरकारों के कैपेक्स पर नजर डालें तो यह अपेक्षाकृत सीमित दायरे में बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल से नवंबर) के आधार पर राज्यों का कैपेक्स जीडीपी का लगभग 1.7 प्रतिशत है, जो पिछले साल के समान है। हालांकि, राज्य स्तर पर पूंजीगत खर्च में औसतन 13 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई है, जो स्थिर लेकिन नियंत्रित विस्तार का संकेत देती है।
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का कैपेक्स भी मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल से नवंबर) में सीपीएसई कैपेक्स अपने वार्षिक लक्ष्य का 64 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसमें सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़त में भारतीय रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय प्राधिकरण (एनएचएआई) का अहम योगदान रहा है। रिपोर्ट का अनुमान है कि CPSEs का कैपेक्स पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है।
हालांकि, जहां केंद्र सरकार के कैपेक्स में आगे चलकर सुस्ती की आशंका जताई गई है, वहीं रिपोर्ट में निजी क्षेत्र के कैपेक्स को लेकर दृष्टिकोण सकारात्मक बताया गया है। इसके पीछे खपत में सुधार, राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहन, और श्रम संहिताओं जैसे संरचनात्मक सुधारों पर बढ़ते नीतिगत कदमों को प्रमुख कारण बताया गया है।