केंद्र सरकार ने आगामी त्योहारी सीजन के मद्देनजर राज्य सरकारों को 1,01,603 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर हस्तांतरित किया है। सरकार ने बताया कि राज्यों को यह धनराशि उनके पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और उनके विकास और कल्याण संबंधी व्यय को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए जारी की गई है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को यह 10 अक्तूबर को जारी किए जाने वाले सामान्य मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है। मंत्रालय ने राज्यों को जारी धनराशि का ब्योरा भी दिया है। इसके अनुसार, देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 18,227 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद बिहार (10,219 करोड़), मध्य प्रदेश (7,976 करोड़), पश्चिम बंगाल (7,644 करोड़), महाराष्ट्र (6,418 करोड़) और राजस्थान (6,123 करोड़ रुपये) का स्थान रहा।इससे पहले, वित्त मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र ने अप्रैल-जुलाई के दौरान करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य सरकारों को 4,28,544 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61,914 करोड़ रुपये अधिक है।
ब्रिटेन की अदालत का फरमान- सरकार को 1,630 करोड़ लौटाए कंपनी
ब्रिटेन के एक हाई कोर्ट ने बुधवार को पीपीई मेडप्रो (PPE Medpro) नाम की कंपनी को अनुबंध के उल्लंघन का दोषी पाया। अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह सरकार को 121 मिलियन पाउंड (लगभग ₹1,630 करोड़) लौटाए। यह कंपनी कोरोना महामारी के दौरान 25 मिलियन सर्जिकल गाउन की आपूर्ति के अनुबंध का उल्लंघन करने की दोषी पाई गई। न्यायाधीश सारा कॉकरिल ने 87 पेज के अपने फैसले में कहा, गाउन अनुबंध के अनुसार स्टरलाइज़ नहीं थे इसलिए इनका उपयोग नहीं किया जा सकता था। बता दें कि पीपीई मेडप्रो की स्थापना साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान ही हुई थी।मशहूर बिजनेसमैन डग बैरोमैन इसका नेतृत्व कर रहे थे, जो मशहूर अंडरगारमेंट ब्रांड अल्टीमो की संस्थापक मिशेल मोन के पति हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार से अनुबंध दिलाने में मिशेल मोन ने इस कंपनी की मदद की थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार को गाउन की कीमत के रूप में हर्जाना वसूलने का अधिकार है। हालांकि, न्यायाधीश सारा ने भंडारण लागत की भरपाई की अपील ठुकरा दी।
जकार्ता में भारत-आसियान बैठक: माल व्यापार समझौते की समीक्षा को लेकर तेजी
भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन के बीच माल व्यापार समझौते की समीक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वार्ता अगले हफ्ते जकार्ता में होगी। 10 देशों के इस समूह के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल छह से सात अक्तू को 11वें दौर की बैठक करेगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, समझौते की समीक्षा पर प्रगति हुई है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप देना बाकी है। 27 अक्टूबर को कुआलालंपुर में होने वाले 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। अगस्त में 10वां दौर नई दिल्ली में हुआ था।
समीक्षा प्रक्रिया संयुक्त समिति के तहत हो रही है, जिसमें आठ उप-समितियां शामिल हैं। ये उप-समितियां कस्टम्स, व्यापार सुविधा, कानूनी मुद्दों, बाजार पहुंच, स्वच्छता मानकों, नियमों की उत्पत्ति, तकनीकी मानकों और व्यापार उपचार जैसे विषयों पर काम कर रही हैं। भारतीय उद्योग लंबे समय से इस समझौते की समीक्षा की मांग करता रहा है, ताकि व्यापार संतुलित और टिकाऊ हो सके। वर्ष 2024-25 में भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 123 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात 39.96 अरब डॉलर और आयात 84.15 अरब डॉलर रहा। 2009 में हस्ताक्षरित और 2010 में लागू हुआ यह समझौता दोनों पक्षों के लिए अहम माना जाता है। 2023 में दोनों पक्षों ने 2025 तक इसकी व्यापक समीक्षा पूरी करने का निर्णय लिया था।