ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव की आशंका:उदय कोटक ने बॉन्ड मार्केट में तेजी पर क्यों दी बड़ी चेतावनी? जानिए सबकुछ – Global Bond Yield Surge: Uday Kotak Cautions Markets Of ‘roller Coaster Ride’ As Us, Japan Rates Climb


वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और बड़े सरकारी कर्जों ने दिग्गज बैंकरों की चिंता बढ़ा दी है। कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने वित्तीय बाजारों को ब्याज दरों में आने वाले बड़े उतार-चढ़ाव (रोलर कोस्टर राइड) के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। उदय कोटक की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में लगातार उछाल देखा जा रहा है। यह बदलाव आने वाले दिनों में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

उदय कोटक ने ब्याज दरों पर क्या बड़ी चेतावनी दी है?

दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वैश्विक ऋण बाजार में मची हलचल की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “ब्याज दर बाजारों में रोलर कोस्टर की सवारी के लिए तैयार रहें क्योंकि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में बेंचमार्क संप्रभु ऋण प्रतिफल (बॉन्ड यील्ड) लगातार बढ़ रहा है”। कोटक ने विशेष रूप से दो देशों के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जापान का 10 साल का सरकारी बॉन्ड प्रतिफल 3% को पार कर गया है और अमेरिका में यह 4.8% पर पहुंच गया है। वर्तमान में अमेरिका के 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 4.81 प्रतिशत पर कारोबार कर रही है, जबकि जापान की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 3.02 प्रतिशत दर्ज की गई है।

ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी के पीछे क्या मुख्य वजह है?

उदय कोटक ने वैश्विक बाजारों के इस अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को बढ़ते हुए सरकारी कर्ज और राजकोषीय असंतुलन से जोड़ा है। उनके अनुसार, वैश्विक केंद्रीय बैंकों पर इस समय मौद्रिक नीति को लेकर भारी दबाव है। कोटक ने समझाते हुए स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे सरकारों का कर्ज और बजट घाटा बढ़ेगा, केंद्रीय बैंकों के पास अपनी बैलेंस शीट का विस्तार करने (यानी नई मुद्रा छापने) के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यदि केंद्रीय बैंक ऐसा कदम उठाते हैं, तो अंततः वैश्विक बाजारों में महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ेगी और अल्पावधि की ब्याज दरें भी तेजी से ऊपर की ओर भागेंगी।

भारतीय बाजारों और विदेशी निवेश पर इसका क्या असर होगा?

अमेरिका और जापान जैसे सुरक्षित बाजारों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर पड़ना तय है। जब विकसित देशों में सरकारी बॉन्डों पर अधिक और सुरक्षित रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) विकासशील देशों से अपनी पूंजी निकालकर इन सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं। इससे भारतीय बाजारों से विदेशी फंडों की बड़ी निकासी हो सकती है, जिससे घरेलू शेयर बाजारों (इक्विटी) और ऋण बाजारों (डेट) पर दबाव बनेगा। घरेलू बाजार की बात करें तो भारत का 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड वर्तमान में 6.96 प्रतिशत पर कारोबार कर रहा है। वहीं, छोटी अवधि के 5-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 6.59 प्रतिशत और लंबी अवधि के 30-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 7.56 प्रतिशत पर है।

दुनिया के अन्य देशों में सरकारी ऋण की क्या स्थिति है?

इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बॉन्ड यील्ड में भी तेजी देखी गई है। यूरोपीय बाजारों की बात करें तो यूनाइटेड किंगडम (यूके) के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.22 प्रतिशत पर दर्ज की गई है। जर्मनी में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 3.34 प्रतिशत और फ्रांस की 10 साल की बेंचमार्क यील्ड 4.21 प्रतिशत पर कारोबार कर रही है। दूसरी ओर, एशियाई बाजारों में चीन का 10 साल का बॉन्ड यील्ड 1.69 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है।



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