Meta का नया ‘टीन सेफ्टी’ फीचर:बच्चे ने की सेल्फ-हार्म की बात, तो तुरंत पैरेंट्स को मिलेगा अलर्ट – Meta Ai Teen Safety Feature Parent Alert Self Harm Detection System
Meta का नया ‘टीन सेफ्टी’ फीचर:बच्चे ने की सेल्फ-हार्म की बात, तो तुरंत पैरेंट्स को मिलेगा अलर्ट – Meta Ai Teen Safety Feature Parent Alert Self Harm Detection System
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आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई की मदद से लेकर निजी सलाह और दिल का हाल साझा करने तक, टीनएजर्स अब एआई चैटबॉट्स पर काफी भरोसा करने लगे हैं। लेकिन क्या हो जब यह बातचीत किसी गंभीर मानसिक उलझन या अवसाद का रूप ले ले? इसी चिंता को दूर करते हुए और ‘टीन सेफ्टी’ (किशोरों की सुरक्षा) को प्राथमिकता देते हुए, मेटा (Meta) ने एक बेहद संवेदनशील और जरूरी कदम उठाया है।
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टीनएजर्स की सुरक्षा करेगा मेटा का नया अलर्ट सिस्टम
– फोटो : AI
कैसे काम करेगा मेटा का यह नया अलर्ट सिस्टम?
कंपनी ने एक नया सेफ्टी फीचर रोलआउट किया है। इसके तहत अगर कोई किशोर मेटा एआई (Meta AI) के साथ चैट के दौरान आत्महत्या या खुद को चोट पहुंचाने (सेल्फ-हार्म) का कोई भी जिक्र करता है, तो एआई तुरंत उस बातचीत को फ्लैग कर देगा।
इसके बाद मेटा की एक विशेष टीम उस चैट की मैन्युअली जांच करेगी। अगर टीम को लगता है कि बच्चे को वाक़ई कोई जोखिम है, तो बिना देर किए सीधे माता-पिता को एक नोटिफिकेशन भेज दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य परिवार को समय रहते आगाह करना है, ताकि संकट की स्थिति में बच्चे को सही वक्त पर मदद मिल सके।
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कई देशों में शुरू हो चुकी है सेवा
– फोटो : Meta
किन देशों में शुरू हुई सुविधा?
यह फीचर अभी अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में शुरू किया गया है। मेटा का कहना है कि साल के अंत तक इसे दूसरे देशों में भी चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। अलर्ट केवल एप नोटिफिकेशन तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर माता-पिता को ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिए भी सूचना भेजी जा सकती है। इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए सुझाव भी साझा किए जाएंगे, ताकि वे अपने बच्चे से संवेदनशील तरीके से बातचीत कर सकें।
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पैरेंट्स को देगा अलर्ट
– फोटो : AI जनरेटेड
पहले क्या होता था, अब क्या बदला?
पहले जब कोई किशोर मेटा एआई से ऐसी कोई नकारात्मक बात करता था, तो चैटबॉट सिर्फ किसी ‘क्राइसिस हेल्पलाइन’ का नंबर दे देता था और किसी भरोसेमंद इंसान से बात करने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर लेता था।
लेकिन अब कंपनी अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हल्के से शक पर भी चैट की समीक्षा की जाएगी। मेटा भविष्य के लिए एक ऐसा सिस्टम भी विकसित कर रहा है जो अत्यधिक आपात स्थिति होने पर सीधे इमरजेंसी सेवाओं (Emergency Services) से भी संपर्क कर सकेगा।
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टीन सेफ्टी को लेकर बढ़ रही है चिंता
– फोटो : Amar Ujala
टीन सेफ्टी को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
हाल के वर्षों में AI चैटबॉट्स के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर कई सवाल उठे हैं। विशेषज्ञ लगातार ऐसे सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे थे, जो टीनएजर्स को जोखिम भरी परिस्थितियों से बचा सकें। मेटा का दावा है कि इस फीचर को विकसित करने के दौरान 75 से अधिक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों की सलाह ली गई।
हालांकि, कई बाल सुरक्षा संगठन मानते हैं कि सिर्फ ‘पैरेंटल अलर्ट’ भेजना काफी नहीं है। उनका तर्क है कि एआई प्लेटफॉर्म्स के ढांचे को ही इतना सुरक्षित बनाया जाना चाहिए कि किशोरों के सामने ऐसे जोखिम भरे हालात और विचार पैदा ही न हों।