Zomato:’गिग मॉडल की असली ताकत है लचीलापन’, बोले दीपिंदर गोयल; 2025 में डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई 10.9% बढ़ी – Zomato Delivery Partner Earnings Rise 10.9% In 2025, Deepinder Goyal Defends Gig Model Flexibility
जोमैटो के डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कंपनी के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने गिग मॉडल का मजबूती से बचाव किया है। उन्होंने बताया कि 2025 में जोमैटो डिलीवरी पार्टनर्स की औसत प्रति घंटे की कमाई 10.9% बढ़कर 102 रुपये हो गई है, जो 2024 में 92 रुपये थी।
दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों में कहा कि अगर कोई डिलीवरी पार्टनर दिन में 10 घंटे और महीने में 26 दिन काम करता है, तो उसकी कुल मासिक कमाई करीब 26,500 रुपये होती है। ईंधन और रखरखाव जैसे खर्च निकालने के बाद नेट आय लगभग 21,000 रुपये बैठती है। यह गणना लॉग-इन समय पर आधारित है, जिसमें इंतजार का समय भी शामिल है।
गिग मॉडल का लचीलापन ही इसकी पहचान
गोयल ने साफ किया कि जोमैटो का गिग मॉडल फुल-टाइम नौकरी का विकल्प नहीं, बल्कि लचीला और अतिरिक्त आय का साधन है। 2025 में एक औसत डिलीवरी पार्टनर ने 38 दिन काम किया, जबकि केवल 2.3% पार्टनर्स ने 250 दिन से ज्यादा काम किया। उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स से पीएफ या तय सैलरी जैसी फुल-टाइम सुविधाओं की मांग इस मॉडल की मूल भावना के खिलाफ है।
10 मिनट डिलीवरी पर सफाई
गोयल ने लिखा, “राइडर्स के ऐप में कोई टाइमर नहीं होता और न ही उन्हें यह पता होता है कि ग्राहक को डिलीवरी का क्या समय बताया गया है। हम राइडर्स को तेज गाड़ी चलाने के लिए नहीं कहते।” इस प्रक्रिया की गणित को समझाते हुए उन्होंने लिखा, “ब्लिंकइट पर ऑर्डर देने के बाद आपका सामान 2.5 मिनट के भीतर पैक कर दिया जाता है। फिर डिलीवरी करने वाला लगभग 8 मिनट में औसतन 2 किलोमीटर से कम की दूरी तय करता है। यानी उसकी औसत गति 16 किमी प्रति घंटा होती है।”
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बीमा और सुविधाओं पर 100 करोड़ खर्च
सुरक्षा के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि सभी डिलीवरी पार्टनर्स का मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस होता है। गोयल के मुताबिक, जोमैटो और ब्लिंकिट ने 2025 में डिलीवरी पार्टनर्स के बीमा पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए। इसमें 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा, 1 लाख रुपये का मेडिकल कवर और लॉस ऑफ पे इंश्योरेंस शामिल है। इसके अलावा महिलाओं के लिए पीरियड रेस्ट डेज, आयकर फाइलिंग सहायता और नेशनल पेंशन स्कीम जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। साथ ही, डिलीवरी में देरी होने पर राइडर्स पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सालाना 65% राइडर्स काम छोड़ देते हैं, जो यह साबित करता है कि लोग इसे अस्थायी तौर पर ही करते हैं।