Fta:भारत ने न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र पर नहीं दी कोई छूट, जानिए इससे क्या फायदा – New Zealand Trade Pact No Duty Concessions In Dairy Sector India New Zealand Free Trade Agreement
भारत ने न्यूजीलैंड के साथ अपने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में घरेलू डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। सोमवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को डेयरी क्षेत्र में आयात शुल्क पर कोई भी रियायत नहीं दी गई है।
दोनों पक्षों ने हाल ही में मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की है, लेकिन भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी बाजार को इस समझौते के दायरे से बाहर रखने में सफलता हासिल की है।
अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “डेयरी क्षेत्र हमारे लिए पूरी तरह से एक ‘रेड लाइन’ (लक्ष्मण रेखा) है। इस समझौते के तहत इस क्षेत्र में शुल्क में कोई रियायत नहीं दी गई है।” यह बयान भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने पिछले सभी व्यापार समझौतों में भी बड़े पैमाने पर डेयरी आयात के लिए दरवाजे खोलने का विरोध करता आया है।
संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दा व्यापार वार्ता के दौरान डेयरी हमेशा से सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक रहा है। जहां न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातकों में से एक है, वहीं भारत में यह क्षेत्र करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा है। भारत के लिए इन किसानों के हितों की रक्षा करना और बाजार को संरक्षण देना एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
मौजूदा व्यापार के आंकड़े व्यावहारिक रूप से देखें तो दोनों देशों के बीच मौजूदा डेयरी व्यापार बहुत कम है। वित्त वर्ष 2025 (FY2025) के आंकड़ों के अनुसार, न्यूजीलैंड से भारत को होने वाला डेयरी निर्यात महज 10 लाख 70 हजार डॉलर (लगभग 9 से 10 करोड़ रुपये) का रहा। इसमें प्रमुख उत्पादों का विवरण इस प्रकार है।
- दूध और क्रीम: 4 लाख डॉलर
- प्राकृतिक शहद: 3.2 लाख डॉलर
- मोजेरेला चीज: 1.8 लाख डॉलर
- मक्खन: 90 हजार डॉलर
- स्किम्ड मिल्क: 80 हजार डॉलर
यह समझौता इस बात का संकेत है कि भारत अपने मुक्त व्यापार समझौतों में भी घरेलू हितों, विशेषकर कृषि और डेयरी क्षेत्र की संवेदनशीलता को सबसे अधिक प्राथमिकता दे रहा है।